वशीकरण मन्त्र का उल्टा प्रभाव लेखनी प्रतियोगिता -16-May-2022
अनुज जब अपनेउ नये मकान से बाहर निकलने लगा तो उसकी नजर एक घर के बाहर लगे एक बोर्ड पर पडी़ कि यहाँ पर आपकी हर समस्या का इलाज किया जाता है जैसे प्रेमिका को बसमें करना। जादू टौना दूर करना खोयाहुआ को पाना भूत प्रेत भगाना आदि अनेक समस्याऔ का तुरन्त समाधान। पंडित भैरव प्रसाद शर्मा।
अनुज जब उस बोर्ड को पढ़रहा था तभी एक सुन्दरी उसको निहारती नजर आयी। वह सुन्दरी मुस्कराती हुई बोली," क्या नाम है तुम्हारा,? तुम शायद इस मकान में नये आये हो?"
"जी " अनुज ने एक छोटा सा उत्तर दिया।
मेरा नाम रश्मि है। शरमाओ मत अब तो तुम हमारे पडौसी हो। एक दूसरे के काम आना ही अच्छे पडौ़सी का धर्म है। किसी भी चीज की जरूरत हो तो बिना किसी हिचकिटाहट के माँग लेना। भाभीजी नजर नहीं आरही है। कोई बात नही नया घर लिया है काम मे ब्यस्त हौगी।" रश्मि ने अनेक बाते एक ही सांस में बिना रुके बतादी।
" नही ऐसी कोई बात नहीं है अभी मै क्वारा हूँ मै अकेला ही रहूँगा।" , अनुज शरमाते हुए बोला।
"कोई बात नही मै आपको शाम को पन्डित जी से मिलवादूँगी वह आपको कोई ऐसा मन्त्र बतादैगे कि आपका कांटा किसी न किसी से भिड़जायेगा।", रश्मि ने मुस्कराते हुए कहा।
" ठीक है भाभीजी मै अपने आफिस जारहा हूँ देर होरही है।" इतना कहकर वह वहाँ से भागने लगा।
अनुज रास्ते में सोचता जारहा था देखो कितनी तेज है अपनी पडौ़सिन।
जब वह शाम को घर वापिस आया तो रश्मि अपने घर के बाहर ही बैठी थी।
"आप आगये मै आपके लिए चाय बनादेती हूँ बैसे भी अभी आप नये आये हो चाय बगैरह का इन्तजाम कहाँ होसका होगा। आपका नाम क्या है। " रश्मि ने पूछा।
"जी मेरा नाम अनुज है। आप क्यौ तकलीफ करती हो मै आफिस से चाय पीकर ही आया हूँ वैसे भी मुझे अधिक चाय पीने की आदत नही है। आनुज अपने घर का ताला खोलता हुआ बोला।
"तकलीफ किस बात की मुझे अपने पडौ़सी की सेवा करने में कोई तकलीफ नही होती है बैसे भी सबसे पहले आफत मुसीबत में पडौ़सी ही काम आता है। " रश्मि बोली।
अनुज ने अपना दरवाजा खोला और अन्दर आगया। कुछ ही देर में रश्मि दो चाय के कप लेकर अन्दर आगयी और एक कप चिय आनुज को देकर एक कप चाय स्वयं पीने लगी।
शाम को जब रश्मि के पति घर आये तब रश्मि ने उनको अनुज के बिषय मे सब बताया और अपने बेटे सुनील को अनुज को बुलाने भेज दिया।
जब अनुज पंडित जी के घर आगया और वह उनको हाथ जोड़कर प्रणाम करने लगा।
पंडित जी प्रणाम का उत्तर देते हुए बोले ," प्रणाम कैसे हो अनुज? अब तुम हमारे नये पडौ़सी हो अपनी कोई भी समस्या हो हमें बताना हम उसे दूर करने की कोशिश करैगे। रश्मि बतारही थी तुम अब तक क्वारे हो। क्याबा त है ? क्या कोई कन्या अब त् पसन्द नही आई ?
अनुज शर्माता हुआ बोला ," असल में मेरा कोई नही है चाचा चाची ने पाला था अब वह भी नही रहे हैं बैसे मै जिस लड़की को प्यार करता था वह मुझे प्यार नहीं करती है इसी लिए अब तक क्वारा हूँ।
"कोई बात नही अब तुम हमारे पडौ़सी हो मै औरौ का कांटा भिड़वा देता हूँ तब पडौ़सी का क्यौ नही। अब मै तुम्है आज एक बशीकरण मन्त्र देता हू इसका हर रोज एक सौ आठ बार जाप करना दो दिन बाद ही असर दिखा देगा और वह लड़की तुम्हारे पीछे दौड़ती नजर आयेगी। मन्त्र मे लड़की का नाम लिख लेना।" पंडित जी उसे समझाते हुए बोले।
" पंडितजी आपकी फीस कितनी है?" अनुज ने पूछा
" बस इक्कीस सौ है तुम से ज्यादा नहीं लूँगा तुम तो अब पडौ़सी हो बेसे इक्यावन सौ है ।", इतना कहकर पंडितजी ने एक कागज का टुकडा़ उसे पकडा़ दिया।
अनुज ने इक्कीस सौ रुपये उनके हाथ पर रख दिये।
इतनी क्या जल्दी थी यह कहकर पंडितजी ने रुपये लेकर अपनी पाकिट में रख लिए।
रश्मि दिन प्रतिदिन अनुज के साथ खुलकर बातै करने लगी जब अनुज ने इस बेमेल बिबाह के बिषय मे पूछा तो बोली '" पता नही इस बुढ़ऊ से पीछा कब छूटेगा। बातौ मे उसने बताया उसकी शादी उसके रिश्तेदार ने करवाई थी यह पंडितजी की तीसरी शादी है दो बेटे है।।
रश्मि अनुज के नजदीक आती जारही थी।और एक दिन अनुज तबियत खराब हौने के कारण घर पर था।
रश्मि उसके लिए चाय लेकर आई तब अनुज बाथरूम में नहारहा था। जैसे ही वह बाथ रूम में झाकने लगी अनुज ने उसे अन्दर खीच लिया और सारी हदै वही पार करदी।
अब तो रश्मि व अनुज आये दिन रंगरेलिया मनाने लगे। बशीकरण मन्त्र का प्रभाव दिखाई देरहा था और एक दिन दौनौ भाग गये और शादी करली।
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इस तरह उनका मन्त्र उनके ऊपर ही लागू होगया। अब पंडित जी किसीको अपना दुःख बताभी नही सकते थे।
Kusam Sharma
03-Jun-2022 09:02 AM
Nice
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Shaqeel
17-May-2022 11:32 PM
👌👏
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Shrishti pandey
17-May-2022 10:32 AM
Nice
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